हिन्दी हमारी मात्रभाषा
Posted on April 16, 2007 by सन्दीप
भारतवर्ष में हिन्दी ब्लोग लिख्नने वालो की कमी नही है कमी है तो कद्र्दानो की जो हमारी मात्रभाषा का प्रयोग करना नही चाह्ते या फ़िर घबराते हैं कि कहीं वो अल्पसन्खयकों मे ना गिने जाऎ या फ़िर लोग उन पर ताना ना मारें.
मेरी गुजारिश है तमाम उन लोगों से जो भयाक्रान्त है इस बात से कि लोग उन्हे गन्वार या जाहिल ना समझे कि अपनी मात्रभाषा मे बात करना कोइ गुनाह नही है. क्या जो अन्ग्रेज अन्ग्रेजी मे बात करते हैं हम उन्हे गन्वार की सन्ग्या (हिन्दी शब्द नही मिला मुझे नाउन के
लिये) देते हैं नही ना तो फ़िर हम क्युन घबरायें. चलो आज से ही हिन्दी के प्रचार में लग जाएं
त्रुटियों के लिये क्षमा प्राथी हूं.
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मैं काफ़ी दिनों से इस बारे में सोच रहा था। क्या आप अपने अनुभव मेरे साथ बाँटना पसंद करेंगे