हिन्दी हमारी मात्रभाषा

भारतवर्ष में हिन्दी ब्लोग लिख्नने वालो की कमी नही है कमी है तो कद्र्दानो की जो हमारी मात्रभाषा का प्रयोग करना नही चाह्ते या फ़िर घबराते हैं कि कहीं वो अल्पसन्खयकों मे ना गिने जाऎ या फ़िर लोग उन पर ताना ना मारें.

मेरी गुजारिश है तमाम उन लोगों से जो भयाक्रान्त है इस बात से कि लोग उन्हे गन्वार या जाहिल ना समझे कि अपनी मात्रभाषा मे बात करना कोइ गुनाह नही है. क्या जो अन्ग्रेज अन्ग्रेजी मे बात करते हैं हम उन्हे गन्वार की सन्ग्या (हिन्दी शब्द नही मिला मुझे नाउन के
लिये) देते हैं नही ना तो फ़िर हम क्युन घबरायेंचलो आज से ही हिन्दी के प्रचार में लग जाएं

त्रुटियों के लिये क्षमा प्राथी हूं.

2 Responses

  1. Your blog has been added to HindiBlogs.com

  2. मैं काफ़ी दिनों से इस बारे में सोच रहा था। क्या आप अपने अनुभव मेरे साथ बाँटना पसंद करेंगे

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